मोबाइल की लत का असर, कंपनियों ने टीवी विज्ञापन खर्च 14% तक घटाया

टीवी सेट्स की संख्या 34%, दर्शक संख्या 37% घटी

मोबाइल की लत और डिजिटल शिफ्ट से टीवी टाइम की बिक्री गिरी है। इससे देश का टेलीविजन बिजनेस चुनौतियों से जूझ रहा है। विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से कमाई घट रही है। विज्ञापन देने वाली कंपनियां बड़े पैमाने पर टीवी से किनारा कर रही हैं। तीन दशकों से भी ज्यादा समय से भारत में ये सबसे गंभीर चुनौती है। हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) और अन्य दैनिक उपभोग (एफएमसीजी) कंपनियों ने कम उपभोक्ता मांग और व्यापक बाजार मंदी के कारण वित्त वर्ष 2024-25 में टीवी विज्ञापन खर्च में कटौती की। एचयूएल ने अपना विज्ञापन और प्रचार खर्च 14% तक कम कर दिया। अन्य एफएमसीजी ब्रांड्स ने भी अपने-अपने टीवी विज्ञापनों में 12% की कटौती की। टीवी चैनल में एड सेल्स, प्रसारण और डिजिटल एड

इंडस्ट्री के डेटा के मुताबिक 2019 में, 21 करोड़ से ज्यादा भारतीय घरों में टेलीविजन सेटस थे। इस दौरान दर्शकों की संख्या करीब 90 करोड़ थी। ये ज्यादातर डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) या केबल वाले घर थे। अब टीवी सेट की संख्या घटकर करीब 15.7 करोड़ रह गई है, जिनकी पहुंच 65.9 करोड़ लोगों तक है। यानी टीवी सेटस की संख्या 34% वहीं दर्शकों की संख्या में करीब 37% की गिरावट आई है। यही वजह है कि प्रमुख विज्ञापनदाताओं का टीवी पर विज्ञापन का बजट घट रहा है।

प्रोफेशनल आशीष सहगल कहते हैं, ‘टीवी विज्ञापन केवल आईपीएल के दौरान ही बढ़ा। बाकी समय इसमें गिरावट आई। टीवी विज्ञापन में तीन-चौथाई हिस्सा रखने वाले टॉप 50 टीवी विज्ञापनदाताओं का खर्च सबसे निचले स्तर पर आ गया है।’

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