भारत में ईवी पर 5% जीएसटी, पेट्रोल कार पर 28%

  • देश में ईवी की क्या संभावनाएं?
    इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर फेम-2 योजना के तहत 10,000 करोड़ रु. के अनुदान की योजना चल रही है। ऑटोमोबाइल कंपनियां भी ईवी निर्माण पर जोर दे रही हैं। ईवी नीति लागू होने से कीमतें घटी हैं, सब्सिडी मिली है और रजिस्ट्रेशन टैक्स में भी छूट मिल रही है।

(पेट्रोल-डीजल वाहन पर 28% टैक्स है और ईवी पर सिर्फ 5%)

  • नीतिगत वजहों से ईवी की बिक्री तेज हो रही है।
    चालू वित्त वर्ष 2024-25 में देश में ईवी की बिक्री 22 लाख यूनिट रहने का अनुमान है।
    ईवी की हिस्सेदारी अब कुल वाहन बिक्री का 6.3% हो गई है।
    (स्रोत: नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार)
सालईवी बिक्री (लाख)पेट्रोल/डीजल/गैस बिक्री (लाख)
20203.241.66
202319.492.61
202422.00 अनुमानित2.63 अनुमानित
202525.14 अनुमानित2.15 अनुमानित
20323.44 करोड़2.34 करोड़
  • देश के पूरे वाहन बाजार में अभी भी ईवी की हिस्सेदारी सिर्फ 6.3% है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक यह हिस्सेदारी 70% तक पहुंचे।
    (स्रोत: नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार)
  • देश में बड़े ईवी खिलाड़ी कौन?
    दोपहिया सेगमेंट में ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी, टीवीएस, बजाज।
    चार पहिया सेगमेंट में टाटा मोटर्स (70% मार्केट शेयर), महिंद्रा, एमजी, हुंडई सबसे आगे हैं।
    अन्य कंपनियों में हीरो इलेक्ट्रिक, ओकिनावा, ओला इलेक्ट्रिक, ओबेन, रिलायंस, टेस्ला, टोयोटा शामिल हैं।
  • नीति आयोग का लक्ष्य क्या है?
    निजी वाहन: 70%,
    वाणिज्यिक वाहन: 40%,
    बसें: 100%,
    तिपहिया वाहन: 80%
    साल 2030 तक इलेक्ट्रिक हो जाएंगे।
    इससे तेल आयात 50% घटेगा, जिससे हर साल $20–25 अरब की बचत होगी।

वो 5 चुनौतियां… जिनसे निपटे बिना ईवी का लक्ष्य मुश्किल

  1. उच्च कीमत: ईवी अब भी सामान्य वाहनों की तुलना में 20-40% महंगे हैं।
  2. चार्जिंग नेटवर्क: देश में सिर्फ 12,000 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं, जबकि जरूरत लाखों की है।
  3. बैटरी निर्माण: 70% बैटरियां चीन से आती हैं, निर्माण और रिसर्च पर ध्यान देना होगा।
  4. वाहन रेंज: एक बार चार्ज करने पर कम दूरी तय होती है।
  5. उपयोगकर्ता भरोसे की कमी: बैटरी खराब होने की चिंता, सर्विसिंग और रखरखाव पर भरोसा नहीं।
PUSHPENDRA KUMAR VARMA  के बारे में
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