मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप अब किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं हैं। युवा पीढ़ी और बच्चे भी खराब जीवनशैली की इन समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। हम स्वस्थ और पारंपरिक जीवनशैली को अपनाकर बीमारियों से बच सकते हैं, आयुर्वेद।
आज युव, वृद्ध, बच्चे हर आयु वर्ग के लोग जीवनशैली से होने वाली परेशानियों से जूझ रहे हैं। यहां तक कि किशोर और किशोरियां भी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
इसकी सबसे बड़ी वजह है हमारी जीवनशैली में आयुर्वेद नियमों की अनदेखी। दिनचर्या की अनियमितता, आहार विहार में असंतुलन, शारीरिक श्रम और व्यायाम की कमी, बदलता मौसम, खान-पान और नींद के अभाव के कारण लोग इन बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
छोटी सी आदतें बदलेंगी तस्वीरें:
आयुर्वेद कहता है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली और आहार पर ध्यान देना जरूरी है। यदि हम सही समय पर खाना खाएं, सही मात्रा में और सही तरीके से खाएं, तो आगे चलकर बीमारियों से बचा जा सकता है।
जीवनशैली में लाएं सुधार
- रात 10 बजे तक सो जाएं और सुबह जल्दी उठने की कोशिश करें।
- पूरे घंटे बैठे रहने की बजाय हल्की फुल्की एक्सरसाइज, व्यायाम करें।
- हेल्दी ब्रेकफास्ट अवश्य करें।
- मौसमी फल-सब्ज़ियों को पूरे दिन के भोजन में शामिल करें।
- इतना काम करें कि शरीर में सकारात्मक थकान महसूस हो।
- शरीर को लेकर लापरवाही, आराम पसंदी, तनाव, चिंता, बेचैनी से रहें दूर।
- न्यूट्रीशस फूड जरूर खाएं।
मोटापा, शुगर का प्रबंधन
जिनको मोटापा और शुगर की समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से ऐसे लोग अपने आहार में विशेष प्रकार की चीजें शामिल कर सकते हैं जैसे जौ, बाजरा, रागी, कोदो, मक्का, ज्वार आदि। इसके अलावा त्रिफला चूर्ण का प्रयोग भी लाभकारी हो सकता है।
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चलना और सप्ताह में 5 दिन योग या व्यायाम करना फायदेमंद रहेगा। यदि आप मोटापा, शुगर जैसी परेशानियों से ग्रसित हैं, तो भी 25 की उम्र के अनूप रहते हुए जिन नियमों को अपनाकर जीवनशैली सुधार लेंगे, तो जीवन भर स्वस्थ रहेंगे।
इस प्रकार छोटे-छोटे नियमों और अनुशासनों को अपनाकर हम आयुर्वेदिक जीवनशैली के जरिए बीमारियों से बचे रह सकते हैं।
मोटापा, मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), तनाव, चिंता, और हृदय रोग प्रमुख जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ हैं।
ये समस्याएं अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। युवा और बच्चे भी खराब जीवनशैली के कारण इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
अनियमित दिनचर्या
असंतुलित आहार
शारीरिक गतिविधियों की कमी
पर्याप्त नींद का अभाव
तनाव व मानसिक दबाव
जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना
नियमित रूप से व्यायाम और योग करना
मौसमी फल और सब्ज़ियाँ खाना
समय पर और सीमित मात्रा में भोजन करना
शरीर को थकान देने वाला सकारात्मक कार्य करना
न्यूट्रीशियस (पोषक तत्वों से भरपूर) भोजन करना
अपने आहार में जौ, बाजरा, रागी, कोदो, मक्का, ज्वार शामिल करें
त्रिफला चूर्ण का सेवन करें (डॉक्टर की सलाह से)
रोज़ाना 30 मिनट तेज़ चलने की आदत डालें
हफ्ते में कम से कम 5 दिन योग करें
फास्ट फूड और मीठे से परहेज करें
आयुर्वेद शरीर की प्रकृति (दोष) के अनुसार इलाज करता है। खान-पान, दिनचर्या और आयुर्वेदिक औषधियों के संयोजन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है और बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।




