बिहार में एसआईआर में जिस तरह से लाखों जमे हुए वोटरों के नाम हटे, उसके बाद से यहां के भाजपा नेताओं ने भविष्यवाणी शुरू कर दी है कि झारग्राम के बड़े इलाके अधिक अवैध बांग्लादेशी वोटर हैं, जिन्हें चुनाव आयोग की विशेष टीम भेज कर हटाएगा। आयोग ने तमाम राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को निर्देश जारी किया था कि वे 1, 2 और 3 अक्टूबर को अपने आपत्तियों की सूची आयोग को सौंप देंगे।
वैसे यह बात नई नहीं है। हर चुनाव से पहले एसआईआर, या ‘वोटर लिस्ट की समीक्षा’ की प्रक्रिया के जरिए लाखों वोटर सूची से हटाए जाते हैं। इसकी प्रक्रिया पूरी तरह से चुनाव आयोग के पास होती है।
लेकिन इस बार भाजपा नेताओं की भविष्यवाणियों से एसआईआर पर बहस शुरू हो गई है। पहली बार एसआईआर से पहले ही सार्वजनिक सभा से संबोधन के बीच की जगह वोटर लिस्ट को साफ करने का मुद्दा दिल्ली जाकर चुनाव आयोग को बताया गया। भाजपा नेताओं ने झारग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा और पश्चिम मेदिनीपुर जैसे जिलों को चिन्हित कर चुनाव आयोग को समझाया कि इन नामों का मताधिकार छीन लिया गया तो जनविरोध होगा। आयोग आना से न खेलो! यह कहा जा रहा है कि यह एसआईआर को लेकर असहज हैं।
ममता ने यह कहा, भाजपा वालों एक केंद्रित मिशन यह कह सकता है कि एसआईआर का हमला झेल रहे हैं वे बांग्लादेशी प्रवासी मतदाता हैं जो बांग्लादेश से आकर घुस गए हैं। क्या ममता की सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा दिया है? क्या वह चुनाव आयोग की रिपोर्ट के ऊपर यह कहेगी कि यह भेदभावपूर्ण है?
मुद्दा सिर्फ एसआईआर और वोटर लिस्ट से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह उन प्रवृत्तियों से जुड़ा है, जो बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों और हिंदी भाषियों को राज्य से बाहर करने की मंशा से जुड़ा है। इसी संदर्भ में ममता सरकार के मंत्री शशि पांजा (संयुक्त सचिवीय स्तर के अधिकारी) ने कहा कि चुनाव आयोग अगर बंगाल में इस तरह का फैसला करेगा तो हम भी सवाल पूछेंगे कि दिल्ली में यह प्रक्रिया क्यों नहीं होती? आखिर चुनाव आयोग को क्या हक है कि वह बंगाल में ऐसा कदम उठाए?
यह सिर्फ वोटर लिस्ट की बात नहीं है। चुनाव आयोग के एसआईआर की प्रक्रिया से चुनाव आयोग के अधिकारी बंगाल के बूथों का फोन करके बांग्ला न बोलने वालों को ‘डाउटफुल’ यानी ‘संदिग्ध प्रक्रिया’ में रख रहे हैं। इस पर सीपीएम के वरिष्ठ नेता ने भी चुनाव आयोग पर भी आपत्तियां रख दी हैं। चुनाव आयोग से जुड़े कुछ अधिकारियों ने इसे पूरी तरह से पूर्वग्रह से ग्रस्त बताया है। एसआईआर की प्रक्रिया बंगाल की परिस्थिति में चुनाव आयोग के निर्देशों से भिन्न है।
आयोग का कहना है कि एसआईआर के तहत अगर इसके बाद कोई शिकायत नहीं होगी, तो वह फाइनल वोटर लिस्ट में जुड़ेंगे। पर ममता की सरकार का कहना है कि बंगाल में लाखों की संख्या में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, जो भारतीय आधार से लेकर वोटर आईकार्ड और राशन कार्ड नहीं बना रहे हैं। यही कारण है कि जैसे ही फर्जी वोटरों की जांच होती है तो उस पर तुरंत प्रतिक्रिया हो रही है।
इसी कारण से ही भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने बंगाल में अपने नए रणनीति के तहत चुनाव से पहले ऐसे इलाके चुने हैं जहां पर भाजपा कमजोर है और भविष्यवाणी कर दी है कि यहां वोटर लिस्ट की समीक्षा कर फर्जी मतदाताओं को हटाया जाएगा।
इस वजह से ही बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ममता सरकार ने कहा है कि अगर ऐसा ही करना है तो पूरे देश में एसआईआर हो। खासकर दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में, जहां पर लाखों की संख्या में फर्जी वोटर हैं।




